Friday, 30 December 2016

52वां ज्ञानपीठ पुरस्कार

वर्ष 1961 में स्थापित भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा संविधान की 8 वीं अनुसूची में वर्णित 22 भारतीय भाषाओं में लेखन करने वाले साहित्यकार को उनके जीवनभर के साहित्यिक योगदान के फलस्वरूप यह पुरस्कार प्रदान किया जाता है। भारतीय ज्ञानपीठ न्यास द्वारा ज्ञानपीठ पुरस्कारभारतीय साहित्य के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार है। इसमें पुरस्कार स्वरूप 11 लाख रुपये, प्रशस्तिपत्र और वाग्देवी की कांस्य प्रतिमा दी  जाती है। प्रथम ज्ञानपीठ पुरस्कार 1965 में मलयालम लेखक जी शंकर कुरुप को प्रदान किया गया था।
ज्ञानपीठ पुरस्कार वर्ष 2016 में आधुनिक बांग्ला साहित्य के लब्ध प्रतिष्ठित बांग्ला कवि शंख घोष को दिया जायेगा. दो दशकों के बाद किसी बांग्ला लेखक को देश का सर्वोच्च साहित्य पुरस्कार प्रदान किया गया है. विद्वान, समालोचक और लेखक डॉ. नामवर सिंह की अध्यक्षता में ज्ञानपीठ चयन बोर्ड की बैठक में निर्णय किया गया कि वर्ष 2016 का 52वां ज्ञानपीठ पुरस्कार आधुनिक बांग्ला साहित्य के जानेमाने कवि शंख घोष को प्रदान किया जायेगा| इससे पहले 1996 में बांग्ला लेखिका महाश्वेता देवी को ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया था. इस लिहाज से वह 19 साल बाद देश का सर्वोच्च साहित्य सम्मान पाने वाले बांग्ला लेखक हैं.

घोष की प्रमुख रचनाओं में आदिम लता-गुलमोमॉय, मूखरे बारो, सामाजिक नोय, बाबोरेर प्रार्थना, दिनगुली रातगुली और निहिता पातालछाया शामिल हैं. उनका जन्म 1932 में हुआ था और उन्हें कवि, आलोचक और विद्वान के तौर पर जाना जाता है. घोष को साहित्य अकादेमी पुरस्कार, सरस्वती सम्मान, रबीन्द्र पुरस्कार जैसे महत्वपूर्ण पुरस्कारों से नवाजा गया है.

वह इस पुरस्कार को पाने वाले छठवें बांग्ला लेखक हैं।
इससे पहले बांग्ला लेखकों ताराशंकर, विष्णु डे, सुभाष मुखोपाध्याय, आशापूर्णा देवी और महाश्वेता देवी को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिल चुका है. पहला ज्ञानपीठ पुरस्कार वर्ष 1965 में मलयालम लेखक जी शंकर कुरूप को प्रदान किया गया था और पिछली दफा वर्ष 2015 के ज्ञानपीठ पुरस्कार से गुजराती लेखक रघुवीर चौधरी को नवाजा गया था|
वर्ष 1965 से अब तक ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेताओं की सूची:-

वर्ष
ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार
2016
शंख घोष (बांग्ला)
2015
रघुवीर चौधरी (गुजराती)
2014
भालचन्द्र नेमाड़े (मराठी) एवं रघुवीर चौधरी (गुजराती)
2013
केदारनाथ सिंह (हिन्दी)
2012
रावुरी भारद्वाज (तेलुगू)
2011
प्रतिभा राय (ओड़िया)
2010
चन्द्रशेखर कम्बार (कन्नड)
2009
अमरकान्त व श्रीलाल शुक्ल (हिन्दी)
2008
अखलाक मुहम्मद खान शहरयार (उर्दू)
2007
ओ.एन.वी. कुरुप (मलयालम)
2006
रवीन्द्र केलकर (कोंकणी) एवं सत्यव्रत शास्त्री (संस्कृत)
2005
कुँवर नारायण (हिन्दी)
2004
रहमान राही (कश्मीरी)
2003
विंदा करंदीकर (मराठी)
2002
दण्डपाणी जयकान्तन (तमिल)
2001
राजेन्द्र केशवलाल शाह (गुजराती)
2000
इंदिरा गोस्वामी (असमिया)
1999
निर्मल वर्मा (हिन्दी) एवं गुरदयाल सिंह (पंजाबी)
1998
गिरीश कर्नाड (कन्नड़)
1997
अली सरदार जाफरी (उर्दू)
1996
महाश्वेता देवी (बांग्ला)
1995
एम.टी. वासुदेव नायर (मलयालम)
1994
यू.आर. अनंतमूर्ति (कन्नड़)
1993
सीताकांत महापात्र (ओड़िया)
1992
नरेश मेहता (हिन्दी)
1991
सुभाष मुखोपाध्याय (बांग्ला)
1990
वी.के.गोकक (कन्नड़)
1989
कुर्तुल एन. हैदर (उर्दू)
1988
डॉ. सी नारायण रेड्डी (तेलुगु)
1987
विष्णु वामन शिरवाडकर कुसुमाग्रज (मराठी)
1986
सच्चिदानंद राउतराय (ओड़िया)
1985
पन्नालाल पटेल (गुजराती)
1984
तक्षी शिवशंकरा पिल्लई (मलयालम)
1983
मस्ती वेंकटेश अयंगर (कन्नड़)
1982
महादेवी वर्मा (हिन्दी)
1981
अमृता प्रीतम (पंजाबी)
1980
एस.के. पोट्टेकट  (मलयालम)
1979
बिरेन्द्र कुमार भट्टाचार्य (असमिया)
1978
एच. एस. अज्ञेय (हिन्दी)
1977
के. शिवराम कारंत (कन्नड़)
1976
आशापूर्णा देवी (बांग्ला)
1975
पी.वी. अकिलानंदम (तमिल)
1974
विष्णु सखा खांडेकर (मराठी)
1973
दत्तात्रेय रामचंद्र बेन्द्रे (कन्नड़) एवं गोपीनाथ महान्ती (ओड़िया)
1972
रामधारी सिंह दिनकर (हिन्दी)
1971
विष्णु डे (बांग्ला)
1970
विश्वनाथ सत्यनारायण (तेलुगु)
1969
फ़िराक गोरखपुरी (उर्दू)
1968
सुमित्रानंदन पंत (हिन्दी)
1967
के.वी. पुत्तपा (कन्नड़) एवं उमाशंकर जोशी (गुजराती)
1966
ताराशंकर बंधोपाध्याय (बांग्ला)
1965
जी शंकर कुरुप (मलयालम)

सुंदरलाल पटवा

28 दिसंबर, 2016 को वरिष्ठ भाजपा नेता एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदर लाल पटवा का हार्ट अटैक के बाद निधन हो गया। वह 92 वर्ष के थे और कुछ समय से बीमार थे। उनकी पत्नी का पहले ही निधन हो चुका है और उनकी कोई संतान नहीं थी। सुंदरलाल पटवा मप्र में पहली बीजेपी सरकार में शामिल रहे थे।
वह मध्य प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रहे।
मुख्यमंत्री के रूप में उनका पहला कार्यकाल 20 जनवरी, 1980 से 17 फरवरी, 1980 तक दूसरा कार्यकाल 5 मार्च, 1990 से 15 दिसंबर, 1992 तक था।
सुंदरलाल पटवा का जन्म मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के कुकड़ेश्वर गांव में 11 नवंबर 1924 को हुआ था।
1941 से इन्‍दौर राज्‍य प्रजा मण्‍डल एवं 1942 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े। उसके बाद 1947 से 1951 तक संघ प्रचारक एवं 1948 से संघ आंदोलन में सात माह जेल यात्रा भी की। 1951 में जनसंघ की स्‍थापना के साथ ही इसके सक्रिय कार्यकर्ता रहे। 1957 से 1967 तक विधान सभा सदस्‍य एवं विरोधी दल के मुख्‍य सचेतक रहे। 1967 से 1974 तक जिला सहकारी बैंक के अध्‍यक्ष रहे। 1975 में म.प्र. जनसंघ के महामंत्री बने। आपातकाल के दौरान 27 जून, 1975 से 28 जनवरी, 1977 तक मीसा बंदी के रूप में जेल में रहे।
वे 20 जनवरी, 1980 से 17 फरवरी, 1980 तक पहली बार मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री बने। उसके बाद सन 1990 के विधान सभा चुनाव में सदस्‍य निर्वाचित हुए एवं 05.03.1990 से 15.12.1992 तक मुख्‍यमंत्री रहे। 1993 में पुन: विधान सभा सदस्‍य के लिए निर्वाचित हुए। 1997 में छिंदवाड़ा से लोकसभा उपचुनाव में विजयी और वाजपेयी सरकार में दो साल मंत्री भी रहे।

दरअसल, 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद सुंदरलाल पटवा सरकार को बर्खास्त कर दिया गया. प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया, जिसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में सरकार बनाई थी|

भारतीय रिजर्व बैंक के नए डिप्टी गवर्नर

28 दिसंबर, 2016 को मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने न्यूयार्क विश्वविद्यालय के स्टर्न स्कूल ऑफ बिजनेस में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर विरल वी. आचार्य को आरबीआई के चौथे डिप्टी गवर्नर चुना | रिजर्व बैंक के 4 डिप्टी गवर्नरों में से एक पद खाली था क्योंकि उस पद पर मौजूद उर्जित पटेल को गवर्नर बना दिया गया था. विरल आचार्य, एनएस विश्वनाथन, एस एस मुंद्रा और रामा सुब्रमण्यम गांधी के साथ आरबीआई के चौथे डिप्टी गवर्नर होंगे. आचार्य को बैंकों और कॉर्पोरेट फाइनेंस का एक्सपर्ट माना जाता है
भारतीय रिजर्व बैंक ने विरल आचार्य को 3 साल के लिए डिप्टी गवर्नर के पद के लिए चुना है. विरल आचार्य जीएसटी बिल के समर्थक हैं और अक्टूबर में उन्होंनें कहा था कि भारतीय अर्थव्यवस्था सुधार की तरफ है. विरल आचार्य ने बैंकों, कॉर्पोरेट फाइनेंस, ऋण जोखिम और परिसंपत्ति मूल्य निर्धारण के विनियमन पर रिसर्च किया है वह वित्तीय क्षेत्र में प्रणालीगत जोखिम क्षेत्र में विश्लेषण और शोध के लिए जाने जाते हैं। और उनको हाल ही में राइजिंग स्टार इन फाइनेंस अवॉर्ड से भी नवाजा गया था. पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन की तरह विरल आचार्य भी शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं.
पहली बार रिजर्व बैंक द्वारा डिप्टी गवर्नर पद पर चयन हेतु विज्ञापन निकाला गया था। आरबीआई में डिप्टी गवर्नर के 4 पद हैं, जिसमें 2 पद प्रमोशन द्वारा, 1 पद वाणिज्यिक बैंकर द्वारा तथा 1 पद एक अर्थशास्त्री द्वारा भरा जाता है।

विरल आचार्य 2008 से न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं. इससे पहले आचार्य लंदन बिजनेस स्कूल से प्राइवेट इक्विटी इंस्टीट्यूट के फाइनेंस एंड एकेडमी डायरेक्टर थे. 2014 में वह सेबी के तहत एकेडमिक काउंसिल ऑफ द नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्योरिटीज मार्केट्स के सदस्य भी रहे हैं. उन्होंने 1995 में आईआईटी मुंबई से कम्प्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. इसके अलावा विरल आचार्य के पास बैंक ऑफ इंग्लैंड में भी काम करने का अनुभव रहा है|